स्वदेशी जागरण मंच बटाला गांधी जी के पर्यावरण और विकास पर विचार गांधी, पर्यावरण और विकास सारांश: गांधीजी के शब्दकोश में विकास के लिए कोई जगह नहीं है। गांधी के अनुसार विकास के बिना भी सामाजिक परिवर्तन संभव है। सामान्यत: विकास शब्द ही विनाश का कारण है। हम विकास के नाम पर बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को स्थापित करने की बात करते हैं, नदियों का रास्ता मोड़ देना चाहते हैं। नतीजा 2013 में उत्तराखंड में आई जल प्रलय के रूप में सामने है। वातावरण में इस तरह के आकस्मिक परिवर्तन के कारण क्या हैं? क्यों असंतुलित मौसम मानव सभ्यता के लिए मुसीबत बनता जा रहा है? पिछले दिनों जापान के शहर ओसाका में संपन्न जी-20 की बैठक में अमेरिका के विरोध के बावजूद पेरिस समझौते को लागू करने की बात हुई। अमेरिका और पश्चिमी देशों की हठधर्मिता की वजह से मौसम का मिजाज बिगड़ता जा रहा है। फ्रांस में इस बार तापमान पैंतालीस डिग्री के पार चला गया। अगर दुनिया के ताकतवर देश अपने स्वार्थों पर अड़े रहे तो मानव सभ्यता को विनाश का विकराल दृश्य झेलना पड़ेगा। भारत की स्थिति तो और बदतर है। चेन्नई का जल संकट बता रहा ह...