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स्वदेशी जागरण मंच बटाला जल्द शुरू करेगा वातावरण बचाओ अभियान
Sandeep salhotra Live 📹📹
स्वदेशी जागरण मंच बटाला वातावरण बचाओ अभियान
स्वदेशी जागरण मंच बटाला (पंजाब) स्वदेशी जागरण मंच बटाला जल्द शुरू करेगा वातावरण बचाओ अभियान और लोगों को जल्द ही इस के तहत जागरूक भी करने का प्रयास किया जाएगा ईस मौके पर संदीप सलहोत्रा (विभाग संयोजक स्वदेशी जागरण मंच अमृतसर) भी मौजूद थे उनहोंने कहा की हम पर्यावरण को बचाने के लिए मुहिम चलाऐगे और लोगो को जागरूक भी करेंगे और हमारा सभी से निवेदन है कि हमारी इस मुहिम मे हिस्सा ले और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके बारे मे बताएं।
स्वदेशी जागरण मंच के श्री भगवती प्रकाश जी के विचार सुनिए
स्वदेशी जागरण मंच बटाला ने मनाया स्वदेशी सप्ताह
संदीप सलहोत्रा ने दिया एक सच्चा संदेश जानिए
सच्चा संदेश आज स्वदेशी जागरण मंच बटाला के विभाग संयोजक श्री संदीप सलहोत्रा ने एक सच्चा संदेश दिया उनहोंने कुछ कहां की:- मेरी पत्नी रजनी सलहोत्रा प्रिंसीपल डॉ मुलख राज सिंह भल्ला डी ए वी स्कूल बटाला ने पिछले 4 वर्षों से राखी का त्यौहार सरहद पर जा कर BSF के जवानों के साथ मनाने का प्रकल्प शुरू किया है, इस अवसर पर जवानों को राखी बांधी जाती है बाद में विद्यार्थी संस्कृति कार्यक्रम भी प्रस्तुति करते है।BSF की 10 बटालियन डेरा बाबा नानक द्वारा विद्यार्थियों के लिए जल पान की व्य्वस्था की जाती है। 14 अगस्त 2019 को हुए कार्यक्रम की कुछ झलकियां ---- जवानों को राखी बांधती प्रिंसीपल श्री रजनी सल्होत्रा :- संदीप सलहोत्रा विभाग संयोजक अमृतसर
स्वदेशी जागरण मंच बटाला की ओर से शहीदों को नमन और पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी
गाँधी जी के पर्यावरण और विकास पर विचार
स्वदेशी जागरण मंच बटाला गांधी जी के पर्यावरण और विकास पर विचार गांधी, पर्यावरण और विकास सारांश: गांधीजी के शब्दकोश में विकास के लिए कोई जगह नहीं है। गांधी के अनुसार विकास के बिना भी सामाजिक परिवर्तन संभव है। सामान्यत: विकास शब्द ही विनाश का कारण है। हम विकास के नाम पर बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को स्थापित करने की बात करते हैं, नदियों का रास्ता मोड़ देना चाहते हैं। नतीजा 2013 में उत्तराखंड में आई जल प्रलय के रूप में सामने है। वातावरण में इस तरह के आकस्मिक परिवर्तन के कारण क्या हैं? क्यों असंतुलित मौसम मानव सभ्यता के लिए मुसीबत बनता जा रहा है? पिछले दिनों जापान के शहर ओसाका में संपन्न जी-20 की बैठक में अमेरिका के विरोध के बावजूद पेरिस समझौते को लागू करने की बात हुई। अमेरिका और पश्चिमी देशों की हठधर्मिता की वजह से मौसम का मिजाज बिगड़ता जा रहा है। फ्रांस में इस बार तापमान पैंतालीस डिग्री के पार चला गया। अगर दुनिया के ताकतवर देश अपने स्वार्थों पर अड़े रहे तो मानव सभ्यता को विनाश का विकराल दृश्य झेलना पड़ेगा। भारत की स्थिति तो और बदतर है। चेन्नई का जल संकट बता रहा ह...

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